हरिद्वार उत्तराखंड

जनता के लिए एकीकृत एंटीमाइक्रोबियल स्टीवर्डशिप प्रथाओं पर एक निःशुल्क फाउंडेशन राष्ट्रीय ई-कोर्स शुरू किया,,,।

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ऋषिकेश/उत्तराखंड*** एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (एएमआर) के बढ़ते वैश्विक खतरे से निपटने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए एम्स ऋषिकेश ने सभी स्वास्थ्य कर्मियों और आम जनता के लिए एकीकृत एंटीमाइक्रोबियल स्टीवर्डशिप प्रथाओं पर एक निःशुल्क फाउंडेशन राष्ट्रीय ई-कोर्स शुरू किया है।

पाठ्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन करते हुए संस्थान की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने एमडीआर, एक्स डीआर और पीडीआर जैसे रोगजनक एएमआर के बोझ से निपटने के लिए समन्वित और साक्ष्य-आधारित दृष्टिकोणों की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत सहित वैश्विक स्वास्थ्य प्रणालियों के लिए एएमआर एक गंभीर खतरा बना हुआ है। उन्होंने बेडसाइड डायग्नोस्टिक्स, संक्रमण की रोकथाम और एंटीमाइक्रोबियल प्रथाओं में मौजूद गंभीर कमियों की ओर भी ध्यान दिलाया। एकीकृत और बहु-विषयक दृष्टिकोण की वकालत करते हुए उन्होंने कहा कि हमें केवल एंटीमाइक्रोबियल दवाओं पर प्रतिबंध लगाने से आगे बढ़कर चिकित्सकों, सूक्ष्मजीवविज्ञानी (माइक्रोबाॅयलाजिस्टों), औषधविज्ञानी (फाॅर्माकोलिजस्टों) और सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के बीच आपसी सहयोग के माध्यम से उपचार (थेरेपी) को इष्टतम बनाने की दिशा में काम करना चाहिए।

बताया गया कि यह पाठ्यक्रम एम्स ऋषिकेश और एस.ए.एस.पी.आइ के बीच एक सहयोगात्मक पहल का प्रमुख परिणाम है, जिसका उद्देश्य विभिन्न स्वास्थ्य सेवा संस्थानों में एकीकृत एंटीमाइक्रोबियल स्टीवर्डशिप की क्षमता को सुदृढ़ बनाना है। यह ई-कोर्स, स्वास्थ्य पेशेवरों और आम जनताकृदोनों के बीच ज्ञान और व्यावहारिक कौशल, दोनों को विकसित करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। जो तर्कसंगत एंटीमाइक्रोबियल प्रिस्क्राइब्रिंग, डायग्नोस्टिक स्टूअर्डशिप और उचित सैंपलिंग, संक्रमण की रोकथाम और नियंत्रण के तरीके, अस्पताल की एंटीमाइक्रोबियल नीतियों का विकास और उन्हें लागू करना, संभावित ऑडिट और फीडबैक तंत्र, एंटीमाइक्रोबियल के उपयोग और परिणामों का मापन और फार्मासिस्टों सहित सामुदायिक स्टूअर्डशिप जैसे मुद्दों पर केन्द्रित है। इस कार्यक्रम में 24 संरचित मॉड्यूल शामिल हैं जो डायग्नोस्टिक-संक्रमण-एंटीमाइक्रोबियल (डीआइए) मॉडल के अनुरूप हैं।

पाठ्यक्रम का नेतृत्व कर रहे मेडिसिन विभाग के एडिशनल प्रो. डॉ. प्रसन कुमार पांडा ने बताया कि पाठ्यक्रम पूरा करने पर प्रतिभागियों को एक इ-प्रमाण पत्र दिया जायेगा। उन्होंने बताया कि इसका समन्वय फार्माकोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी, कम्युनिटी मेडिसिन और ईएनटी विभागों के फैकल्टी द्वारा किया जा रहा है। बताया कि यह कोर्स एक समर्पित लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम Ims.saspi.In के माध्यम से ऑनलाइन उपलब्ध है।

हाइब्रिड मोड के माध्यम से इस अवसर पर सोसाइटी ऑफ एंटीमाइक्रोबियल स्टीवर्डशिप प्रैक्टिसेस (एसएएसपीआइ) के तत्वाधान में राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों से जुड़े 100 से अधिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ कार्यक्रम में जुड़े थे। जबकि एम्स ऋषिकेश से चिकित्सा अधीक्षक प्रो. बी. सत्या श्री, डॉ. पीके पांडा, डॉ. भूपिंदर, डॉ. अमित कुमार, डॉ. महेंद्र, डॉ. अंबर, डॉ. वान्या, डॉ. मनीष, डॉ. बलराम, डॉ. माथुरिया, आकांक्षा और सुश्री विनीता आदि उपस्थित रहे।

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