देहरादून

हिंदुओं को ईसाई बनाने को कोशिश करने वाली महिलाएं थीं क्रिप्टो क्रिश्चियन, गिरोह की आशंका,,,।

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देहरादून/उत्तराखंड*** क्रिप्टो-क्रिश्चियन शब्द उन लोगों के लिए प्रयोग किया जाता है जो बाहरी तौर पर किसी अन्य धर्म का पालन करते दिखते हैं लेकिन गुप्त रूप से ईसाई धर्म का प्रचार-प्रसार करते हैं। राजधानी में ऐसी ही दो महिलाएं सामने आई हैं।

राजधानी में क्रिप्टो-क्रिश्चियनिटी जैसी गुप्त धार्मिक गतिविधियों की आशंका ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। आरोप है कि कांवली गांव में जो महिलाएं घर-घर जाकर हिंदू परिवारों को ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित करने की कोशिश कर रही थीं वह भी क्रिप्टो क्रिश्चियन थीं जिससे उन्हें देखकर कोई अंदाजा नहीं लगाया जा सकता था कि वह किस धर्म से संबंध रखती हैं।

क्रिप्टो-क्रिश्चियन शब्द उन लोगों के लिए प्रयोग किया जाता है जो बाहरी तौर पर किसी अन्य धर्म का पालन करते दिखते हैं लेकिन गुप्त रूप से ईसाई धर्म का प्रचार-प्रसार करते हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि ये महिलाएं सामान्य सामाजिक संपर्क के बहाने घरों में प्रवेश कर धार्मिक विचारों से प्रभावित करने का प्रयास कर रही थीं। बताया जा रहा है कि क्रिप्टो-क्रिश्चियनिटी की अवधारणा तीसरी शताब्दी में रोमन साम्राज्य के समय सामने आई थी जब ईसाइयों पर अत्याचार के कारण कई लोग अपनी पहचान छिपाकर गुप्त रूप से धर्म का पालन करते थे।

कांवली गांव के इस मामले के बाद स्थानीय निवासियों और हिंदू संगठनों में आक्रोश है। लोगों ने प्रशासन से इस तरह की गतिविधियों की जांच कराने और सख्त कार्रवाई की मांग की है। वहीं, कुछ सामाजिक संगठनों का कहना है कि यदि इस प्रकार के संगठित प्रयास हो रहे हैं तो यह क्षेत्र में सामाजिक तनाव का कारण बन सकते हैं।
सूत्रों के मुताबिक, दून और आसपास के क्षेत्रों में इस तरह के कई छोटे-छोटे समूह सक्रिय होने की आशंका जताई जा रही है। फिलहाल यह मामला संवेदनशील बना हुआ है और प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

सावरकर संगठन के अध्यक्ष कुलदीप स्वेडिया ने पुलिस को दी तहरीर में मांग की है कि दोनों महिलाओं के खिलाफ उत्तराखंड धर्मांतरण विरोधी कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके। उन्होंने कहा कि देहरादून में इस तरह के मामले बढ़ रहे हैं। खुलेआम धर्मांतरण कराने के प्रयास हो रहे हैं जिस पर तत्काल रोक लगनी चाहिए।

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