उम्र के आखिरी पड़ाव में भी महिलाएं वृद्धावस्था पेंशन पाने के लिए सिस्टम की लापरवाही से भटक रही हैं,,,।



रिखणीखाल/ पौड़ी गढ़वाल*** बुढ़ापे का सहारा माने जाने वाली वृद्धावस्था पेंशन आज भी 70 वर्ष पार कर चुकी कई महिलाओं के लिए एक लम्बी लड़ाई और थका देने वाली लड़ाई बन गई है।कागजों पर योजना सरल दिखती हैं लेकिन जमीन पर महिलाओं को पेंशन पाने तक पहुंचने में कई रुकावटें व परेशानी झेलनी पड़ती है।
रिखणीखाल प्रखंड के दूरस्थ व सीमान्त गाँव सिलगांव की 70 वर्षीय महिला सुधा देवी पत्नी स्वर्गीय सुल्तान सिंह (01.01.1957) एवं 61 वर्षीय महिला भगती देवी पत्नी चन्द्र सिंह (01.01.1965) वृद्धावस्था पेंशन पाने के लिए कई सालों से अपने निर्वाचित प्रतिनिधि का चक्कर काटते काटते ऊब गये हैं व थकान महसूस कर रहे हैं। लेकिन फिर भी वृद्धावस्था पेंशन के कागजात नहीं बन रहे हैं।
जबकि उत्तराखण्ड के मुख्य मंत्री का स्पष्ट कहना है कि,60 साल पूर्ण होते ही किसी भी महिला,पुरुष की वृध्दावस्था पेंशन स्वतः चालू हो जायेगी।अभी तक सुधा देवी को पेंशन लेते हुए 10 साल हो जाने थे,लेकिन सिस्टम की कार्य प्रणाली, लापरवाही,अकर्मण्यता, चुनावी द्वेष भाव, मनमुटाव आदि कारणों से ये लोग पेंशन पाने से दूर हैं।
क्या जिला प्रशासन, समाज कल्याण विभाग आदि इनकी समस्या का समाधान करने का प्रयत्न करेंगे ?




