पौड़ी गढ़वाल: पीएम पोषण योजना से लेकर विद्यालयों के कायाकल्प तक जिलाधिकारी ने की व्यापक समीक्षा,,,।

प्रथम चरण में जिले के 50 विद्यालयों का किया जायेगा कायाकल्प, आधुनिक सुविधाओं से होंगे लैस
निर्माण कार्यों के लिए तय की समय-सीमा, सभी प्रगतिरत निर्माण कार्य 30 सितंबर तक होंगे पूर्ण

पौड़ी गढ़वाल / उत्तराखंड *** जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया की अध्यक्षता में बुधवार को पीएम पोषण शक्ति निर्माण योजना के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2026-27 की वार्षिक कार्ययोजना, मध्याह्न भोजन योजना तथा शिक्षा विभाग के अंतर्गत संचालित विभिन्न निर्माण एवं विकास कार्यों की व्यापक समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जनपद के प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में संचालित पीएम पोषण योजना, भोजन की गुणवत्ता, खाद्यान्न आपूर्ति, बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण, विद्यालयों में मूलभूत सुविधाएं, विद्यालय रूपांतरण, निर्माण कार्यों तथा शैक्षणिक परिणामों की विस्तार से समीक्षा की गई।
बैठक में विद्यालयों की बेस्ट प्रैक्टिस, बोर्ड परीक्षाओं की तैयारियों, स्कूल ग्रेडिंग सिस्टम तथा मासिक मूल्यांकन परीक्षाओं के परिणामों की समीक्षा की गई। जिला शिक्षाधिकारी ने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देशन में गत शिक्षा सत्र में बोर्ड परीक्षाओं के परिणामों में सकारात्मक सुधार देखने को मिला है। इसी क्रम में इस वर्ष भी विद्यालय ग्रेडिंग सिस्टम के अंतर्गत मासिक मूल्यांकन परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी। जिलाधिकारी ने कहा, बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी के लिए मासिक मूल्यांकन टेस्ट का स्वतंत्र मूल्यांकन कराया गया है, जिससे परीक्षार्थियों की गुणवत्ता बढ़ी है। उन्होंने निर्देश दिए कि विद्यार्थियों को परीक्षा की बेहतर तैयारी एवं प्रश्नपत्र हल करने में सुविधा के लिए शिक्षकों द्वारा मॉडल उत्तर तैयार किए जाएं, ताकि विद्यार्थी उत्तर लेखन की सही पद्धति को समझ सकें और परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन कर सकें। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन विद्यालयों का परीक्षा परिणाम 60 प्रतिशत से कम रहा है, उनका चिन्हीकरण कर परिणाम कमजोर रहने के कारणों का विश्लेषण किया जाए। ऐसे विद्यालयों के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार कर आवश्यक ओरियंटेशन एवं मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाए। वहीं, बेहतर परिणाम देने वाले विद्यालयों की बेस्ट प्रैक्टिस को चिन्हित कर अन्य विद्यालयों में भी अपनाया जाए। उत्कृष्ट परीक्षा परिणाम प्राप्त करने वाले विद्यालयों तथा बेहतर प्रदर्शन करने वाले शिक्षकों को सम्मानित किया जाएगा।
जिलाधिकारी ने बताया कि विद्यालय रूपांतरण के तहत प्रथम चरण में छात्र संख्या के आधार पर 50 विद्यालयों का चयन किया गया है। इन चयनित विद्यालयों का चरणबद्ध रूप से कायाकल्प करते हुए उन्हें आवश्यक सुविधाओं से संतृप्त किया जाय। इसी क्रम में जिलाधिकारी ने सभी विकासखंडों से छात्र संख्या के आधार पर ऐसे विद्यालयों की सूची तैयार कर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए, जहां उपलब्ध संसाधनों के माध्यम से प्रभावी ढंग से विद्यालयों का रूपांतरण किया जा सके। उन्होंने निर्देश दिए कि चयनित विद्यालयों में स्मार्ट बोर्ड, पुस्तकालय, प्रयोगशाला, झूले, आरओ फिल्टर, खेल उपकरण जैसी आधुनिक सुविधाएं सुनिश्चित की जाएंगी। इसके साथ ही विद्यार्थियों को आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के लिए स्मार्ट क्लास एवं विज्ञान प्रयोगशाला जैसी सुविधाओं को भी शामिल किया जाए।
जिलाधिकारी ने कहा कि जनपद मुख्यालय स्थित डॉ. अंबेडकर जिला विज्ञान संग्रहालय को विद्यार्थियों की शैक्षणिक गतिविधियों से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों द्वारा संग्रहालय का नियमित भ्रमण कर वैज्ञानिक गतिविधियों एवं प्रदर्शों का लाभ लिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मॉडल विद्यालयों का विकास केवल भवन एवं आधारभूत सुविधाओं तक सीमित न रहे, बल्कि विद्यालयों को विद्यार्थियों के लिए बेहतर शिक्षण एवं सीखने का वातावरण उपलब्ध कराने वाले मॉडल के रूप में विकसित किया जाए। ग्रामीण निर्माण विभाग को इसके लिए निर्धारित फॉर्मेट तैयार कर उपलब्ध कराने तथा संबंधित विभागों को विद्यालयवार प्रस्ताव तैयार कर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में विद्यालयों में गैस कनेक्शन, स्वच्छ पेयजल, किचन गार्डन, शौचालय, फर्नीचर, कक्ष-कक्ष तथा किचन-कम-स्टोर की स्थिति की समीक्षा के दौरान कुछ विद्यालयों में गैस कनेक्शन न होने के कारण लकड़ी के चूल्हे पर भोजन बनाए जाने की जानकारी सामने आयी। जिलाधिकारी ने छात्र संख्या के आधार पर ऐसे विद्यालयों की सूची तैयार कर गैस कनेक्शन के लिए प्रस्ताव प्रस्तुत करने के निर्देश दिए, जिससे गैस सुविधा से सभी विद्यालयों को संतृप्त किया जा सके। जिन विद्यालयों के गैस कनेक्शन बंद हो चुके हैं और जहां उनकी आवश्यकता नहीं है, जिलाधिकारी ने ऐसे कनेक्शनों को आवश्यकता वाले अन्य विद्यालयों में स्थानांतरित करने की कार्रवाई विकासखंड स्तर पर सुनिश्चित करने को कहा गया।
बैठक में जिला शिक्षाधिकारी (प्राथमिक) ने बताया कि जनपद के 2309 प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पीएम पोषण योजना के तहत निर्धारित साप्ताहिक मेन्यू के अनुसार विद्यार्थियों को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। जिलाधिकारी ने भोजन की गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए प्रत्येक माह कम से कम 15 विद्यालयों का निरीक्षण करने के निर्देश दिए। उन्होंने आरबीएसके के माध्यम से भोजन का थर्ड पार्टी वेरिफिकेशन कराने तथा बाजार से खरीदी जाने वाली खाद्य सामग्री की गुणवत्ता की नियमित जांच सुनिश्चित करने को कहा। साथ ही खंड शिक्षाधिकारियों को विद्यालयों का निरीक्षण करने और अभिभावक संघ एवं विद्यालय प्रबंधन समितियों से संवाद कर योजना की जमीनी स्थिति की जानकारी लेने के निर्देश दिए। खाद्यान्न आपूर्ति की समीक्षा के दौरान पोर्टल में तकनीकी समस्या के कारण उठान एवं वितरण की सूचना में आ रही दिक्कतों पर जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि समस्या दूर होने तक जिला पूर्ति कार्यालय पीएम प्रकोष्ठ को मैन्युअल रूप से सूचना उपलब्ध कराए। उन्होंने विकासखंड स्तर पर गठित क्रियान्वयन एवं अनुश्रवण समितियों की त्रैमासिक बैठकें नियमित रूप से आयोजित कर योजना की प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करने को कहा।
विद्यालयों में बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि जिन बच्चों में स्वास्थ्य संबंधी समस्या पायी जाती है, उनका चिकित्सकीय परीक्षण कराया जाए। अधिक स्वास्थ्य समस्याओं वाले बच्चों की अलग सूची तैयार कर उनकी नियमित निगरानी की जाए तथा आवश्यकता के अनुसार चिकित्सकों से उनका परीक्षण एवं उपचार कराया जाए। बैठक में विशेष भोज कार्यक्रम को प्रभावी बनाने के लिए शिक्षा विभाग को जनप्रतिनिधियों एवं अन्य अधिकारियों से बेहतर समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों से संपर्क कर विशेष भोज के माध्यम से बच्चों को लाभान्वित किया जाए। बैठक में भोजनमाताओं के मानदेय की स्थिति की भी जानकारी ली गयी।
बैठक में शिक्षा विभाग के अंतर्गत संचालित विभिन्न निर्माण कार्यों की भी विस्तृत समीक्षा की गयी। जिला योजना, राज्य योजना तथा वित्तीय वर्ष 2024-25, 2025-26 एवं 2026-27 के स्वीकृत एवं गतिमान कार्यों की प्रगति की जानकारी लेते हुए जिलाधिकारी ने कार्यदायी संस्थाओं को स्वीकृत कार्यों को अनावश्यक रूप से लंबित न रखने के निर्देश दिए। वित्तीय वर्ष 2025-26 के ऐसे कार्य जो स्वीकृत होने के बावजूद अभी तक शुरू नहीं हुए हैं, उन पर जिलाधिकारी ने नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि स्वीकृत कार्यों को निर्धारित समयसीमा में पूर्ण किया जाना चाहिए। उन्होंने वित्तीय वर्ष 2026-27 के कार्य भी शीघ्र शुरू करने के निर्देश देते हुए कहा कि जिन कार्यों में भूमि, तकनीकी अथवा अन्य किसी प्रकार की समस्या है, उनकी जानकारी सितंबर माह तक अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जो ठेकेदार कार्य शुरू नहीं कर रहे हैं अथवा कार्य अधूरा छोड़ रहे हैं, उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करते हुए आवश्यकता पड़ने पर ब्लैकलिस्ट करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कार्यदायी संस्थाओं को निर्माण कार्यों की गुणवत्ता एवं नियमित निगरानी पर विशेष ध्यान देने को कहा गया। साथ ही आपदा से क्षतिग्रस्त विद्यालयों का चिन्हीकरण कर उनके मरम्मत एवं पुनर्निर्माण के लिए तत्काल एस्टीमेट तैयार कर प्रस्तुत करने को कहा गया, ताकि आवश्यक कार्य समयबद्ध रूप से शुरू कराए जा सकें।
पेयजल निर्माण निगम एवं ग्रामीण निर्माण विभाग को निर्देश देते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि जो निर्माण कार्य शुरू हो चुके हैं, उन्हें 31 अगस्त तक, अन्य लंबित कार्यों को 15 सितंबर तक तथा राज्य योजना के कार्यों को 30 सितंबर तक पूर्ण किया जाए। सभी कार्यों की प्रगति फोटो सहित उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी ने कहा कि जहां निर्माण के लिए उचित स्थान उपलब्ध नहीं है, वहां संबंधित उच्चाधिकारी स्वयं स्थल निरीक्षण कर निर्माण कार्य की औचित्यता का परीक्षण करते हुए रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे। उन्होंने 100 प्रतिशत पूर्ण कार्यों के हस्तांतरण की प्रक्रिया शीघ्र शुरू करने के निर्देश दिए। बैठक में समग्र शिक्षा के अंतर्गत विद्यालय प्रबंधन समितियों द्वारा कराए जा रहे वित्तीय वर्ष 2026-27 के कार्यों को मार्च 2027 तक अनिवार्य रूप से पूर्ण करने के निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी ने निर्धारित अवधि में कार्य पूर्ण न होने पर संबंधित धनराशि वापस लिए जाने के भी निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने कहा कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, पौष्टिक भोजन तथा सुरक्षित एवं स्वच्छ विद्यालयी वातावरण उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है। पीएम पोषण योजना से लेकर विद्यालयों के आधारभूत ढांचे और शैक्षणिक गुणवत्ता तक प्रत्येक स्तर पर नियमित अनुश्रवण, गुणवत्ता नियंत्रण, जवाबदेही और समयबद्धता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने अधिकारियों एवं कार्यदायी संस्थाओं को स्वीकृत योजनाओं का लाभ निर्धारित समय में विद्यार्थियों तक पहुंचाने के निर्देश दिए।
इस अवसर पर मुख्य शिक्षाधिकारी अत्रेश सयाना, जिला शिक्षाधिकारी बेसिक अंशुल बिष्ट, अर्थ एवं संख्याधिकारी राम सलोने, जिला पूर्ति अधिकारी अरुण कुमार वर्मा, अधिशासी अभियंता जल संस्थान टीएस रावत, अधिशासी अभियंता पेयजल निर्माण शाखा श्रीनगर वीरेंद्र भट्ट, अधिशासी अभियंता आरडब्ल्यूडी कोटद्वार बीएम आर्य, पौड़ी केपी भट्ट, खंड शिक्षाधिकारी मास्टर आदर्श सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।




