कोटद्वार पौड़ी गढ़वाल

कोटद्वार: 2007 में भाजपा सरकार द्वारा लालढांग-चिल्लरखाल मार्ग के निर्माण को मौखिक रोक लगा दी गई, कब-कब क्या हुआ सच्चाई को जानिये: सुरेंद्र सिंह नेगी (पूर्व मंत्री उत्तराखंड)

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कोटद्वार/पौड़ी गढ़वाल*** आज पूर्व मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस की गई जिसमें उन्होंने कहा कि लालढांग-चिल्लरखाल मोटर मार्ग का निर्माण जनहित में शीघ्र बनाया जाना चाहिए दोनों मण्डलों को जोड़ने वाला यह मार्ग उत्तराखण्डवासियों की लाइफ लाइन है।

कब-कब क्या हुआ सच्चाई को जानिये

29 मार्च 2003 शासनादेश सं० 77/ लो०नि०/2003-104 (प्र०आ०) द्वारा कोटद्वार-गैण्डीखाता तथा लालढांग प्रथम चरण 91.50 लाख (13 कि० 1 कि०मी० स्वीकृत कराया गया।

07.09.2005 EPI कम्पनी के साथ वन मार्गों को सुदृढ़ीकरण MOU (अनुबन्ध)

03.07.2006 लालढांग-चिल्लरखाल मोटर मार्ग निमार्ण के लिए अपर प्रमुख सचिव उत्तराखण्ड द्वारा 778/12-10-2 दि० 3.07.2006 निर्माण के लिए आदेश जारी किया गया। कुल 13 कि०मी० वन मार्ग के निर्माण के लिए डीपीआर लागत 278.90 लाख बनायी गई।

जिस पर EPI कम्पनी ने टेण्डर प्रक्रिया पूरी करते हुए सबसे कम बिड वाले को निर्माण कार्य करने की अनुमति प्रदान की।

सत्ता परिवर्तन बी० जे०पी० सत्ता में आई वर्ष 2007 मार्च में मई/जून 2007 में भाजपा सरकार द्वारा लालढांग-चिल्लरखाल मार्ग के निर्माण को मौखिक रोक लगा दी।

20.09.2007 को शासनादेश सं0 4465/X-2-2007-9 (6) द्वारा ई०पी०आई० कम्पनी को उक्त मोटर मार्ग पर निर्माण न कराने का आदेश जारी कर दिया गया।

अफसोस इस बात का है कि वर्ष 2007-2012 तक भाजपा के कार्यकाल में लालढांग-चिल्लरखाल मोटर मार्ग पर कोई भी निर्माण कार्य नहीं करवाया गया। जो हो भी रहा था उसको भी रोक दिया गयाII

पुनः सत्ता परिवर्तन कांग्रेस सत्ता में

वर्ष 2012 में पुनः हमने 2012-13 में लालढांग चिल्लरखाल मोटर मार्ग को ई०पी०आई० कम्पनी से सम्पर्क किया, उनके मना करने के उपरान्त पुनः मार्ग निर्माण के लिए प्रयास किए गए जिसके तहत नये सिरे से मार्ग निर्माण की कार्यवाही कराई गयी तथा भारत सरकार की नई गाइड लाइन के तहत State Wild Life Board जिसकी अध्यक्षता प्रदेश के मुख्यमन्त्री करते हैं ने मार्ग को बनाने पर सहमति बनवायी गयी।

06.12.2014 जिसके तहत (लालढांग-चिल्लरखाल मोटर की फ्लाई ओवर (एलेवेटेड) एवं मोटर मार्ग निर्माण हेतु प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति ली गयी जिसकी लागत 418.30 लाख थी। जिस पर तेजी से कार्य करवाया गया व समय पर डी०पी०आर० शासन को भेजी गई। जिस पर आज तक कोई कार्यवाही नहीं हो पायी।

दि० 22.11.2016 को शासनादेश सं0 3031/111 (27/16-12 (प्रा०आ०) के द्वारा मोटर मार्ग निर्माण हेतु 706.60 लाख की स्वीकृति प्रदान की गई। तथा लो०नि०वि० पौड़ी द्वारा निविदा (टेण्डर) आमन्त्रित किए गए तथा निविदा दि० 15.12.2016 को खोली गयी।

पुनः 2017 में सत्ता परिवर्तन (भाजपा) सरकार

मार्च 2017 के बाद मोटर मार्ग को इस हद तक उलझा दिया गया कि मामला सुप्रीम कोर्ट में है। वर्तमान भाजपा सरकार द्वारा वर्ष 2017 से 2025 तक क्या किया पूछा जाना चाहिए?

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