कोटद्वार: आचार्य डॉ. सिद्धार्थ नैथानी सहित चार शिक्षाविदों को मिली ‘विद्या-वाचस्पति’ एवं ‘विद्या-सागर’ मानद उपाधि से किया सम्मानित,,,।




कोटद्वार/हरिद्वार/वाराणसी *** दिव्य गंगा मिशन हरिद्वार के तत्वावधान में काशी हिन्दी विद्यापीठ, वाराणसी द्वारा आयोजित एक गरिमामय सम्मान समारोह में उत्तराखंड के चार शिक्षाविदों को शिक्षा, साहित्य, संस्कृति एवं भारतीय ज्ञान परम्परा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए ‘विद्या-वाचस्पति’ (मानद उपाधि) से सम्मानित किया गया।
समारोह में देशभर से आए विद्वानों, शिक्षाविदों एवं साहित्यकारों की उपस्थिति में डॉ. सुनीता डंडरियाल विद्यासागर, आचार्य डॉ. सिद्धार्थ नैथानी, डॉ. शोभा तिवाड़ी तथा डॉ. लक्ष्मी चौहान को ‘विद्या-वाचस्पति’ सम्मान-पत्र एवं स्मृति-चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि सम्मानित शिक्षाविद् अपने-अपने क्षेत्रों में शिक्षा, संस्कृति, सामाजिक जागरूकता तथा भारतीय मूल्यों के संवर्धन में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। विशेष रूप से डीएवी पब्लिक स्कूल, कोटद्वार के हिन्दी एवं संस्कृत शिक्षक आचार्य डॉ. सिद्धार्थ नैथानी विद्यासागर द्वारा हिन्दी एवं संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार, विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों के विकास तथा भारतीय संस्कृति के संरक्षण हेतु किए जा रहे कार्यों की सराहना की गई।
वक्ताओं ने कहा कि डॉ. सुनीता डंडरियाल विद्यासागर ने शिक्षा एवं साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है। वहीं डॉ. शोभा तिवाड़ी एवं डॉ. लक्ष्मी चौहान को सामाजिक एवं शैक्षिक गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता तथा समाजहित में किए गए उत्कृष्ट कार्यों के लिए सम्मानित किया गया।
सम्मान प्राप्त करने के उपरांत सभी सम्मानित शिक्षाविदों ने इस उपलब्धि का श्रेय अपने गुरुओं, अभिभावकों, सहयोगियों एवं विद्यार्थियों को दिया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान उन्हें शिक्षा, संस्कृति एवं समाज सेवा के क्षेत्र में और अधिक समर्पण, निष्ठा एवं प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने की प्रेरणा प्रदान करेगा।
इस अवसर पर उपस्थित अतिथियों ने सभी सम्मानित शिक्षाविदों को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। सम्मान की इस उपलब्धि पर क्षेत्र के शिक्षकों, विद्यार्थियों, साहित्यप्रेमियों एवं शुभचिंतकों में हर्ष का वातावरण है।




