कोटद्वार पौड़ी गढ़वाल

कोटद्वार: राजेश जदली के नेतृत्व में नगर निगम द्वारा पशु क्रूरता मामले को लेकर पशु प्रेमियों ने प्रदर्शन कर विरोध किया गया,,,।

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कोटद्वार/पौड़ी गढ़वाल*** नगर निगम द्वारा गौवंशों को पकड़कर दूसरी जगह भेजने एवं पशु क्रूरता के संदर्भ में राजेश जदली के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन कर उप जिलाधिकारी को ज्ञापन दिया,।

पशु प्रेमी व सामाजिक कार्यकर्ता राजेश जदली ने कहा कि हम कोटद्वार के चिंतित नागरिक एवं पशु-प्रेमी, आपके संज्ञान में एक अत्यंत गंभीर एवं चिंताजनक घटना हैं। रात के समय नगर निगम द्वारा गायों और नंदियों को सड़कों से उठाकर अज्ञात स्थान पर भेज दिया गया है, जो आपके आदेशों के तहत की गई बताई जा रही है, ने पूरे शहर में भारी चिंता और आक्रोश पैदा किया है। इस नाम निम्न बिंदुओं पर तत्काल स्पष्टीकरण एवं ठोस कार्यवाही अपेक्षित है।

  1. स्थानांतरण में पारदर्शिता

बिना किसी पूर्व सूचना के रात में ही पशुओं को क्यों हटाया गया?

स्थानांतरण का आधिकारिक कारण क्या था?

इन्हें कहाँ ले जाया गया? कृपया गौशाला का नाम, स्थान व प्रबंधन से संबंधित विवरण लिखित रूप में कराया जाए।

2. क्रूरता एवं कानूनी उल्लंघन

इन गायों और नंदियों को बेहद बेरहमी से उठाया गया और ट्रकों में बुरी तरह ठूंस-ठूस कर रखा गया। रात बारिश में घंटों तक खड़े रहे।

रातों-रात यह स्थानांतरण बिना किसी उचित दस्तावेज, पशु-चिकित्सीय जांच, सार्वजनिक सत्यापन की और पारदर्शिता के किया गया, जो सांविधिक नियमों का उल्लंघन है।

इस प्रकार की कार्रवाई उत्तराखंड के गौवंश संरक्षण कानूनों एवं Prevention of Cruelty to Animal के मानकों के तहत स्पष्ट रूप से अवैध है।

  1. राज्य से बाहर भेजने का निर्णय

जब कोटद्वार में पहले से कई गौशालाएँ और आश्रय स्थल मौजूद हैं, तो इन गायों को राज्य से बाहर क्यों नाम

कोटद्वार की गौशालाओं को विकलांग, बीमार और वृद्ध गौवंश के लिए तैयार करने और सुधारने के लिए निगम द्वारा क्या कार्य किया जा रहा है?

क्या इन गौ वंशों को राज्य के बाहर भेजने से पहले किसी प्रकार का कल्याण आकलन या अनुमति ली गई

4. पशुओं की पहचान (वेरिफिकेशन)

नगर निगम केवल दो पशु-प्रेमियों को ही पहचान की अनुमति क्यों दे रहा है?

यह प्रतिबंध किस कानूनी या प्रशासनिक आधार पर लगाया गया?

जब कई नागरिक इन पशुओं की पहचान और देखरेख में जुड़े हैं, तो केवल दो व्यक्तियों द्वारा सभी पशुओं की सही पहचान संभव कैसे है?

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  1. समुदाय की भागीदारी

क्या आप एक बड़े, प्रतिनिधि समूह को गौशाला जाकर अपने पशुओं की पहचान करने की अनुमति

  1. पशुओं का कल्याण व सुरक्षा

क्या यह सुनिश्चित किया गया है कि सभी पशुओं को पर्याप्त भोजन, स्वच्छ पानी, आश्रय और पशु-चिकित्सा सुविधा मिल रही है?

एक स्वतंत्र पशु-चिकित्सक टीम को तुरंत वहाँ जाकर उनकी स्थिति का आकलन करने की अनुमति दी जाए

जवाबदेही

यह कार्रवाई किस कानून या नगर निगम के नियम के तहत की गई?

यदि किसी पशु के गुम होने, घायल होने या मरने की स्थिति आती है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?

हमारी मांगें

48 घंटों के भीतर स्थानांतरण से जुड़ी पूरी जानकारी का लिखित विवरण सार्वजनिक किया जाए।

पशु कल्याण समुदाय के कई सदस्यों की भागीदारी के साथ संयुक्त पहचान प्रक्रिया की अनुमति दी जाए।

भविष्य में किसी भी पशु स्थानांतरण के लिए स्पष्ट एवं पारदर्शी नीति बनाई जाए, जिसमें सार्वजनिक सूचना और पशु-कल्याण के सभी प्रावधान हों।

स्थानीय गौशालाओं का उन्नयन एवं सुधार तत्काल किया जाए ताकि कोटद्वार के सभी गौवंश यहीं सुरक्षित रह सकें।

हम सभी यह मानते हैं कि शहर में व्यवस्था बनाए रखना आवश्यक है, किंतु यह कार्यवाही कानूनी, मानवीय एवं पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए। हम आशा करते हैं कि आप इस मामले में संवेदनशीलता एवं जिम्मेदारी के साथ तत्काल कार्रवाई करेंगे।

प्रदर्शन में चिंतित नागरिक और पशु प्रेमी इंद्रजीत सिंह रावत, सत्य प्रकाश ढोंडियाल, उर्मिला कंडवाल, रुचि नेगी, शालू रावत, प्रदीप कंडवाल ,अनुज, दृष्टि नेगी, आकांक्षा रावत आदि शामिल रहे।

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