न्यू दिल्ली
Trending

राजस्थान: सीकर में एक ही दिन में अदालती निषेधाज्ञाओं से रुकवाए पांच बच्चों के बाल विवाह,,,।

[gtranslate]

सीकर / राजस्थान *** बाल विवाह के खात्मे के प्रयासों को गति देते हुए राजस्थान के सीकर जिले में न्यायपालिका, पुलिस प्रशासन व नागरिक समाज संगठनों के सहयोग से एक ही दिन में अदालती निषेधाज्ञा (इंजंक्शन आर्डर) के जरिए पांच बच्चों का बाल विवाह रुकवाया गया। इनमें से दो लड़के ऐसे हैं जिनकी उम्र महज नौ व 12 साल थी और आटा-साटा प्रथा के तहत इनका विवाह भी हमउम्र नाबालिग लड़कियों के साथ हो रहा था जबकि एक लड़की की उम्र 18 साल से भी कम है।

बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए 250 से भी अधिक नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के सहयोगी गायत्री सेवा संस्थान को सूचना मिली कि गोकुलपुरा थाने के एक गांव में एक नाबालिग बच्ची की शादी हो रही है। संस्थान के सदस्य पुलिस के साथ मौके पर पहुंचे लेकिन गांव के कुछ लोगों ने जानकारी छिपाने की कोशिश की। बच्ची के परिजनों ने भी पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की और कहा कि बच्ची बालिग है। लेकिन वे उम्र संबंधी दस्तावेज दिखाने में आनाकानी करते रहे। आखिर में जब बच्ची के स्कूल से उसकी जन्मतिथि मंगवाई गई तो उसमें उसकी उम्र 18 साल से कम निकली और उसकी 42 साल के एक विधुर से शादी हो रही थी।

हालांकि टीम को इसी बीच पता चला कि उसी परिवार में छह जुलाई को आटा-साटा प्रथा के तहत नौ और 12 साल के दो और लड़कों की शादी होने वाली है। जिन लड़कियों से इनका विवाह हो रहा था, वे भी लगभग इसी उम्र की थीं। गायत्री सेवा संस्थान ने बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के तहत इन बाल विवाहों को रुकवाने के लिए सीकर के अतिरिक्त न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में अर्जी दी जिन्होंने निषेधाज्ञा आदेश जारी करते हुए आदेश दिया कि बालिग होने से पहले इन बच्चों का विवाह नहीं किया जा सकता।

विवाह रुक जाने से राहत की सांस लेते हुए 12 साल के लड़के ने बताया कि वह बड़ा होकर वकील बनना चाहता है और उसे डर था कि शादी के बाद उसकी पढ़ाई छूट जाएगी और उसे किसी काम धंधे में लगा दिया जाएगा।

गायत्री सेवा संस्थान के निदेशक व राजस्थान बाल आयोग के पूर्व सदस्य डॉ. शैलेंद्र पंड्या ने कहा कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम (पीसीएमए) 2006 पर अमल में सीकर अगुआई कर रहा है। इससे पहले अक्षय तृतीया के दौरान जिले में पहली बार अदालती निषेधाज्ञाओं से दो बच्चियों का बाल विवाह रुकवाया गया था। इससे लोगों में यह संदेश गया है कि बाल विवाह के खिलाफ कानून अब कागजी नहीं रहे, बल्कि अब इस पर सख्ती से और प्रभावी तरीके से अमल किया जा रहा है।

जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के राष्ट्रीय संयोजक रवि कांत ने अदालती आदेश की प्रशंसा करते हुए कहा, “बाल विवाह की रोकथाम के लिए हमारे देश में कानून हमेशा से सख्त और प्रगतिशील रहे हैं लेकिन इन पर गंभीरता से अमल की कमी थी। लेकिन अब नागरिक समाज संगठनों के जनजागरूकता अभियानों से माहौल बदला है और लोग खुद आगे आकर बाल विवाहों की सूचना दे रहे हैं। निषेधाज्ञा आदेशों के जरिए एक ही दिन में पांच बाल विवाह रोकने से यह साबित होता है कि कानून के साथ खिलवाड़ नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि राजस्थान में जिस तरह से सरकार, समाज व न्यायपालिका बाल विवाह के खिलाफ एकजुटता व दृढ़ संकल्प दिखा रहे हैं, उससे उम्मीद जगी है कि हम जल्द ही बाल विवाह मुक्त राजस्थान के सपने को पूरा होते देखेंगे।”

और जानकारी के लिए संपर्क करें
जितेंद्र परमार
8595950825

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button