लैंसडाउन: कतेडा नदी पर निर्मित पुल पर सुरक्षा पाइप व रैलिंग क्षतिग्रस्त होकर शरारती तत्वों द्वारा चोरी किये गये,,,।




रिखणीखाल / पौड़ी गढ़वाल *** लैंसडौन विधान सभा के अन्तर्गत कतेडा नदी पर निर्मित लोहे के पुल की सुरक्षा पाइप व रैलिंग क्षतिग्रस्त व शरारती तत्वों द्वारा 2-3 लोहे के पाइप चोरी की भेंट चढ़ गये। ये पुल कंडलसेरा-द्वारी-भौन सड़क मार्ग पर बना है।
ये लोहे का विशाल पुल सन 1991 से आरम्भ होकर सन 1994 ई0 में बनकर तैयार होकर आवा-जाही के लिए खोल दिया गया था।ये द्वारी-भौन सड़क मार्ग पर स्थित होने से रिखणीखाल के सीमांत गाँवों व नैनीडांडा के सभी गाँवों के लिए जीवन रेखा माना जाता है।ये पुल नैनीडांडा से आगे कुमाऊँ-मंडल को जोड़ता है।ये लोहे का पुल कतेडा नदी पर बना है।
अभी किसी यू ट्यूबर द्वारा जानकारी में आया है कि ये 32-35 ,साल पुराना पुल पर जो लोहे के पाइप व रैलिंग लगे थे,क्षतिग्रस्त होकर अज्ञात चोरों द्वारा 2-3 पाइप चोरी की शिकायत मिली है।कई जगह पाइप व रैलिंग वेल्डिंग से छिटक कर अलग-थलग हो गये हैं। कई जगह खतरा बना हुआ है।काफी ऊँचा पुल है,पुल पर सुरक्षा रैलिंग टूटने से स्कूली बच्चों महिला,वाहनों को खतरा हो सकता हो।रात्रि में और भी ज्यादा खतरा है ,जो लोग नशे का सेवन करते हैं। कभी भी अनहोनी हो सकती है।कई जगह रैलिंग पर जंक आदि भी लगा है।विभाग ने निर्माण अवधि से कोई मरम्मत आदि की सम्भावना कम ही नजर आती है।
90 के दशक से पहले इस दुर्गम पहाड़ी इलाके में और बरसाती नदी को आर पार करने के लिए ग्रामीणों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। लोग स्कूली बच्चो को कंधे में ढोकर आर पार कराते थे,इसके बनने के बाद वाहनों की आवा-जाही शुरू हो सकी।
चूँकि ये 32-35 साल पुराना सेतु है इसलिए इसकी भार क्षमता आज के भारी वाहनों के अनुकूल सीमित है।वर्तमान में स्थानीय जनता द्वारा इस मार्ग पर यातायात के बढते दबाव को देखते हुए एक नये आधुनिक और अधिक भार क्षमता वाले Double lane द्वि लेन कंक्रीट पुल बनाने की मांग तेजी से उठ रही है।यह पुल आज भी इस सड़क मार्ग का लाइफलाइन माना जाता है,और रिखणीखाल के सीमांत व दुर्गम गाँवों के विकास का एक प्रमुख गवाह है।
अब स्थानीय लोगों की मांग व आवश्यकता है कि इस पुल का मौका मुआयना करके चोरी व क्षतिग्रस्त पाइप, रैलिंग को वेल्डिंग कराकर व नये पाइप लगाकर व अन्य जरूरी सुविधाओं का विस्तारीकरण करें। ये रिखणीखाल व नैनीडांडा का मुख्य जीवन रेखा के लिए उपयोगी व महत्वपूर्ण साबित होगा।




