पौड़ी गढ़वाल उत्तराखंड

नमामि गंगे अभियान के तहत महाविद्यालय जयहरीखाल में विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन,,,।

जयहरीखाल/ पौड़ी गढ़वाल *** भक्तदर्शन राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, जयहरीखाल में गंगा उत्सव-2026 के अंतर्गत नमामि गंगे कार्यक्रम के तत्वावधान में विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। विद्यार्थियों में गंगा नदी के संरक्षण, स्वच्छता एवं पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से भाषण, रंगोली एवं पोस्टर प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं।

भाषण प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने गंगा नदी के धार्मिक, सांस्कृतिक एवं पर्यावरणीय महत्व पर अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने गंगा की निर्मलता एवं अविरलता बनाए रखने, जल प्रदूषण रोकने तथा नदियों के संरक्षण में जनभागीदारी की आवश्यकता पर बल दिया। प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में शामिल डॉ. सुभाष पोखरियाल (भौतिक विज्ञान विभाग) एवं डॉ. अर्चना नौटियाल (भूगोल विभाग) द्वारा आलोक, बी.ए. तृतीय वर्ष को प्रथम, अमीषा रावत, बी.ए. तृतीय वर्ष को द्वितीय तथा अरमान, बी.ए. तृतीय वर्ष को तृतीय स्थान प्रदान किया गया।

रंगोली प्रतियोगिता में छात्र-छात्राओं ने अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए आकर्षक रंगोलियों के माध्यम से गंगा संरक्षण एवं स्वच्छता का संदेश दिया। प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में शामिल डॉ. रमेश चंद्र कश्यप (गणित विभाग) एवं डॉ. पवनिका चंदोला (वनस्पति विज्ञान विभाग) द्वारा ग्रुप ई को प्रथम, ग्रुप डी को द्वितीय तथा ग्रुप बी को तृतीय स्थान प्रदान किया गया।

पोस्टर प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने सुंदर एवं संदेशपरक पोस्टरों के माध्यम से गंगा को स्वच्छ एवं प्रदूषण मुक्त बनाने का आह्वान किया। प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में शामिल डॉ. दुर्गा रजक (अर्थशास्त्र विभाग) एवं डॉ. सुमन कुकरेती (हिंदी विभाग) द्वारा कनिका कुकरेती, एम.एससी. तृतीय सेमेस्टर को प्रथम, कुमकुम रावत, एम.एससी. प्रथम सेमेस्टर को द्वितीय तथा अमीषा रावत, बी.ए. तृतीय सेमेस्टर को तृतीय स्थान प्रदान किया गया।

महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो. एल. आर. राजवंशी ने अपने संबोधन में कहा कि गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि भारत की धार्मिक, सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक विरासत का अभिन्न अंग है। युवाओं को गंगा संरक्षण के प्रति जागरूक एवं जिम्मेदार बनाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे पर्यावरण संरक्षण एवं नदियों की स्वच्छता के कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभाएं और समाज में भी इसके प्रति जागरूकता फैलाएं।

इस अवसर पर कोटद्वार महाविद्यालय के जंतु विज्ञान विभाग के डॉ. मोहन कुकरेती ने अपने व्याख्यान में गंगा नदी के जैविक एवं पारिस्थितिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गंगा नदी का संरक्षण केवल जल की स्वच्छता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी जैव विविधता एवं जलीय पारिस्थितिकी तंत्र को सुरक्षित रखना भी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि नदी में बढ़ता प्रदूषण जलीय जीवों एवं संपूर्ण पारिस्थितिकी के लिए गंभीर चुनौती है। इसके लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने के साथ-साथ आमजन को भी नदी संरक्षण के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी।

वहीं, महाविद्यालय के भूगोल विभाग के डॉ. वसीम अहमद ने अपने वक्तव्य में गंगा नदी के भौगोलिक एवं पर्यावरणीय महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गंगा नदी का संरक्षण उसकी अविरलता, निर्मलता एवं प्राकृतिक प्रवाह को बनाए रखने से जुड़ा हुआ है। उन्होंने नदी घाटी क्षेत्र में बढ़ते मानवीय हस्तक्षेप, प्रदूषण एवं प्राकृतिक संसाधनों के अनियंत्रित दोहन के दुष्परिणामों की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि गंगा के संरक्षण के लिए स्थानीय समुदायों की सहभागिता, सतत विकास एवं प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग आवश्यक है।

कार्यक्रम के संयोजक डॉ. अजय रावत ने विद्यार्थियों को नमामि गंगे कार्यक्रम के आठ स्तंभों से परिचित कराया तथा गंगा संरक्षण के विभिन्न आयामों की जानकारी देते हुए उन्हें अपने दैनिक जीवन में स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण संबंधी आदतें अपनाने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया। इस आयोजन के माध्यम से विद्यार्थियों में रचनात्मकता के साथ-साथ प्रकृति एवं नदियों के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने का संदेश दिया गया।

कार्यक्रम का संचालन हिंदी विभाग के विभाग प्रभारी डॉ. उमेश ध्यानी द्वारा किया गया। इस अवसर पर डॉ. सत्यानंदन भगत, डॉ. शिप्रा, डॉ. देवेंद्र सिंह चौहान, डॉ. मानसी वत्स, डॉ. जया काण्डपाल, डॉ. दीपक दुर्गापाल, डॉ. शोएब अंसारी, डॉ. दीपिका, डॉ. फकीर सिंह सहित महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

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